ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ा फ्रॉड कौन सा है? जानिए असली सच्चाई
पिछले महीने मेरे एक जानने वाले ने Instagram पर एक ऐड देखा - एक ब्रांडेड जूता जो मार्केट में 3000 रुपये का था, वहाँ सिर्फ 499 रुपये में मिल रहा था। उन्होंने बिना सोचे-समझे ऑर्डर कर दिया, पेमेंट भी कर दी। दस दिन बाद जब पार्सल आया, तो डिब्बे में जूते की जगह एक साबुन की टिकिया निकली। यह सुनकर मुझे बहुत हैरानी नहीं हुई, क्योंकि आजकल ऐसे किस्से हर दूसरे दिन सुनने को मिल जाते हैं।
सच कहूं तो ऑनलाइन शॉपिंग जितनी आसान और सुविधाजनक हो गई है, उतनी ही तेजी से इसमें फ्रॉड के तरीके भी बढ़ गए हैं। और सबसे चिंता की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि वो कब और कैसे ठगी का शिकार बन गए। इस पोस्ट में मैं आपको बताऊंगा कि आखिर ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ा और सबसे आम फ्रॉड कौन सा है, यह कैसे काम करता है, और इससे कैसे बचा जाए।
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ऑनलाइन
शॉपिंग में सबसे बड़ा फ्रॉड: फेक वेबसाइट और डुप्लीकेट ई-कॉमर्स ऐप्स
अगर मुझे
एक शब्द में जवाब देना हो, तो सबसे बड़ा फ्रॉड है - नकली या क्लोन की गई ई-कॉमर्स
वेबसाइट/ऐप के जरिए होने वाली ठगी। यह फ्रॉड इतना बड़ा इसलिए है क्योंकि इसमें
एक साथ दो नुकसान होते हैं - पहला आपका पैसा जाता है, और दूसरा आपकी बैंकिंग या पर्सनल
जानकारी भी चोरों के हाथ लग जाती है।
यह कैसे काम
करता है, जरा समझिए:
1. सोशल
मीडिया पर लुभावने ऐड
फेसबुक, इंस्टाग्राम या व्हाट्सएप पर आपको एक ऐड दिखता है जिसमें भारी डिस्काउंट का
दावा किया जाता है। ऐड पर क्लिक करते ही आप एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जो हूबहू
किसी बड़े ब्रांड जैसी दिखती है, लेकिन असल में वह एक फर्जी डोमेन होता है।
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2. भरोसा
जीतने के लिए नकली रिव्यू और टाइमर
इन फेक साइट्स पर जानबूझकर फर्जी कस्टमर रिव्यू, "सिर्फ 2 घंटे बचे हैं"
जैसे काउंटडाउन टाइमर, और "सिर्फ 3 पीस बचे हैं" जैसे मैसेज दिखाए जाते हैं
ताकि आप जल्दबाजी में बिना सोचे पेमेंट कर दें।
3. पेमेंट
के बाद गायब हो जाना
पेमेंट होते ही या तो सामान आता ही नहीं, या फिर कोई सस्ता-सा नकली प्रोडक्ट भेज दिया
जाता है। कई बार तो पेमेंट पेज ही इतना असली दिखता है कि लोग अपना कार्ड नंबर, CVV
और OTP तक डाल देते हैं - और यहीं से असली नुकसान शुरू होता है।
इसके अलावा
ये तरीके भी बहुत आम हैं
केवल फेक
वेबसाइट ही नहीं, बल्कि कुछ और तरीके भी आपको जरूर पता होने चाहिए क्योंकि ये उतने
ही खतरनाक हैं:
- QR कोड स्कैम: OLX या Facebook
Marketplace जैसी साइट्स पर सामान बेचने वाले लोगों को "पेमेंट रिसीव करने
के लिए यह QR स्कैन कीजिए" कहकर भेजा जाता है, जबकि असल में QR स्कैन करते
ही पैसा अकाउंट से कटता है, आता नहीं।
- कैश ऑन डिलीवरी में स्विच स्कैम: डिलीवरी बॉय असली पार्सल की
जगह मिलता-जुलता खाली या हल्का डिब्बा पकड़ा देता है, और आप बिना खोले पेमेंट
कर देते हैं।
- फर्जी कस्टमर केयर नंबर: गूगल पर सर्च करने पर किसी ई-कॉमर्स
कंपनी का जो "कस्टमर केयर नंबर" दिखता है, वह असल में स्कैमर का डाला
हुआ नंबर होता है, जो रिफंड के नाम पर आपसे बैंक डिटेल्स ले लेता है।
- फेक डिस्काउंट कूपन ऐप्स: कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स
"एक्स्ट्रा कैशबैक" के नाम पर आपसे ऐसी परमिशन ले लेते हैं जिससे आपके
फोन का डेटा चोरी हो सकता है।
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कैसे पहचानें
कि वेबसाइट असली है या नकली?
मैं खुद जब
भी कोई नई साइट से शॉपिंग करता हूं, तो यह चार चीजें जरूर चेक करता हूं:
- URL ध्यान से पढ़ें - असली Amazon या Flipkart की
स्पेलिंग से मिलता-जुलता लेकिन थोड़ा अलग डोमेन (जैसे amaz0n-sale.com) फ्रॉड
की निशानी है।
- वेबसाइट की उम्र चेक करें - नई-नई बनी साइट पर भारी डिस्काउंट
देखकर सावधान हो जाएं।
- रिव्यू सिर्फ उसी साइट पर नहीं,
गूगल पर अलग से सर्च करके देखें
- असली शिकायतें अक्सर बाहर मिलती हैं।
- पेमेंट पेज पर
"https" और लॉक आइकन जरूर देखें, लेकिन सिर्फ इसी पर भरोसा न करें, क्योंकि फ्रॉड
साइट्स भी अब यह इस्तेमाल करने लगी हैं।
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अगर फ्रॉड
हो जाए तो क्या करें?
· ठगी का पता चलते ही सबसे पहला काम करें - अपने बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल लगाकर कार्ड को तुरंत ब्लॉक करवा दें, ताकि आगे कोई और नुकसान न हो।
· साइबर क्राइम की हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करें या cybercrime.gov.in पर जाकर रिपोर्ट करें।
- जिस ऐप या नंबर से पेमेंट किया,
उसका स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन डिटेल्स सुरक्षित रखें, यह आगे शिकायत में काम
आते हैं।
छोटी लेकिन
जरूरी बात
मैंने खुद
महसूस किया है कि ज्यादातर फ्रॉड इसलिए होते हैं क्योंकि हम "बहुत सस्ता मिल रहा
है" वाली भावना में जल्दबाजी कर बैठते हैं। असल में अगर कोई डील बहुत ज्यादा अच्छी
लग रही हो, वह ज़्यादातर मामलों में एक चेतावनी होती है, मौका नहीं।
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अक्सर
पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सबसे
ज्यादा फ्रॉड किस तरह की वेबसाइट पर होते हैं?
सबसे ज्यादा फ्रॉड उन वेबसाइट्स पर होते हैं जो सोशल मीडिया ऐड के जरिए प्रमोट की जाती
हैं और भारी डिस्काउंट का वादा करती हैं, लेकिन इनका कोई भरोसेमंद रिव्यू या हिस्ट्री
मौजूद नहीं होती।
2. क्या
कैश ऑन डिलीवरी हमेशा सुरक्षित होता है?
पूरी तरह नहीं। पार्सल खोलकर चेक करने से पहले पेमेंट न करें, क्योंकि स्विच स्कैम
कैश ऑन डिलीवरी में भी हो सकता है।
3. QR
कोड स्कैन करने से पैसा कट क्यों जाता है?
क्योंकि QR कोड पेमेंट लेने के लिए नहीं, बल्कि पेमेंट भेजने के लिए इस्तेमाल होता
है। पेमेंट पाने के लिए कभी भी QR स्कैन करने की जरूरत नहीं होती।
4. अगर
पेमेंट कर दिया और सामान नहीं आया तो पैसा वापस मिल सकता है?
अगर आपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI से पेमेंट किया है, तो बैंक और कार्ड नेटवर्क
में चार्जबैक की सुविधा होती है। तुरंत बैंक से संपर्क करें और साइबर क्राइम पोर्टल
पर भी शिकायत दर्ज करें।
नोट:- यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता
के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी अलग-अलग सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित
है और इसे किसी भी प्रकार की कानूनी या वित्तीय सलाह न समझा जाए। किसी भी फ्रॉड की
स्थिति में कृपया संबंधित बैंक, साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या
cybercrime.gov.in से संपर्क करें।
WhatsApp पर आया ये मैसेज? रुक जाइए,
कहीं ये स्कैम तो नहीं!
ये लिंक क्लिक किया तो सब डेटा चला
जाएगा!" - सच में ऐसा होता है क्या? पूरी जानकारी
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