Website URL में "https" ना हो तो क्या सच में खतरा है? पूरी जानकारी

पिछले महीने की बात है, मेरी छोटी बहन ने मुझे व्हाट्सएप पर एक स्क्रीनशॉट भेजा और पूछा, "भैया ये साइट खोलूं या नहीं? इसमें lock का निशान नहीं दिख रहा।" मैंने ज़ूम करके देखा तो पता चला कि उस वेबसाइट के एड्रेस बार में "https" की जगह सिर्फ "http" लिखा हुआ था। यही एक छोटा सा "s" कई बार आपकी पूरी ऑनलाइन सुरक्षा तय कर देता है, और ज़्यादातर लोगों को इसका अंदाज़ा भी नहीं होता।

HTTPS के बिना वेबसाइट URL और ऑनलाइन सुरक्षा का खतरा

अगर आप भी कभी सोचते हैं कि ब्राउज़र में दिख रहा वो छोटा सा पैडलॉक आइकन या "https" का "s" आखिर करता क्या है, तो आज इस पोस्ट में हम इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे - बिना किसी टेक्निकल जर्गन के।

पहले ये समझिए कि URL में "http" और "https" का मतलब क्या होता है

जब भी आप ब्राउज़र में कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो आपका डिवाइस और उस वेबसाइट का सर्वर आपस में डेटा का आदान-प्रदान करते हैं। ये आदान-प्रदान किस तरीके से होगा, यही तय करता है "प्रोटोकॉल" - यानी नियमों का एक सेट।

  • HTTP (Hypertext Transfer Protocol) - यह पुराना तरीका है जिसमें डेटा बिना किसी सुरक्षा परत के भेजा जाता है। मतलब अगर कोई बीच में डेटा को पकड़ ले, तो वो उसे आसानी से पढ़ सकता है।
  • HTTPS (Hypertext Transfer Protocol Secure) - इसमें वही डेटा एक एन्क्रिप्शन लेयर (जिसे SSL/TLS कहते हैं) से गुज़रकर भेजा जाता है, जिससे बीच में कोई उसे पकड़ भी ले तो उसे समझ नहीं पाता।

सीधी भाषा में कहें तो HTTP एक खुली चिट्ठी है और HTTPS एक बंद, सील किया हुआ लिफाफा।

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अगर वेबसाइट में https नहीं है तो असल में खतरा क्या है

अब बात करते हैं उस असली सवाल की जिसके लिए आप यहां आए हैं। अगर किसी साइट के आगे सिर्फ "http" लिखा है और पैडलॉक की जगह "Not Secure" का वॉर्निंग दिख रहा है, तो नीचे दी गई परेशानियां हो सकती हैं:

1. डेटा चोरी होने का खतरा अगर आप उस साइट पर अपना नाम, फोन नंबर, ईमेल या पासवर्ड डालते हैं, तो वो जानकारी बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट पर सफर करती है। कोई भी व्यक्ति जो उसी नेटवर्क पर है (जैसे पब्लिक वाई-फाई), चाहे तो उस डेटा को बीच में पकड़ सकता है। इसे तकनीकी भाषा में "मैन-इन-द-मिडिल अटैक" कहते हैं।

2. फिशिंग और नकली साइट का शिकार बनना बहुत सारी फ्रॉड वेबसाइट्स असली बैंक या शॉपिंग साइट जैसी दिखती हैं लेकिन उनमें https नहीं होता। ऐसी साइट पर लॉगिन डिटेल डालते ही आपका डेटा सीधे स्कैमर तक पहुंच जाता है।

3. ब्राउज़र की चेतावनी और भरोसे में कमी Chrome, Firefox जैसे ब्राउज़र अब खुद-ब-खुद "Not Secure" का लेबल दिखा देते हैं। इससे यूज़र का भरोसा उठ जाता है और वो साइट छोड़कर चला जाता है - जिसका सीधा नुकसान वेबसाइट मालिक को भी होता है।

4. पेमेंट और फॉर्म डेटा का जोखिम अगर किसी साइट पर पेमेंट गेटवे या कोई फॉर्म बिना https के काम कर रहा है, तो कार्ड डिटेल जैसी संवेदनशील जानकारी असुरक्षित तरीके से ट्रांसफर होती है - जो सीधे फाइनेंशियल फ्रॉड का रास्ता खोल सकती है।

5. सर्च इंजन रैंकिंग पर असर यह सिर्फ यूज़र की सुरक्षा का मामला नहीं है। गूगल खुद https को एक रैंकिंग फैक्टर मानता है। यानी बिना https वाली वेबसाइट सर्च रिजल्ट में पीछे रह सकती है, भले ही उसका कंटेंट कितना भी अच्छा क्यों न हो।

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यह कैसे चेक करें कि कोई साइट सुरक्षित है या नहीं

इसके लिए आपको कोई ऐप डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं। बस इन तीन चीज़ों पर ध्यान दीजिए:

  • एड्रेस बार में URL के शुरुआत में "https://" लिखा होना चाहिए, सिर्फ "http://" नहीं।
  • URL के बाईं ओर एक छोटा पैडलॉक (lock) आइकन दिखना चाहिए।
  • अगर ब्राउज़र "Not Secure" या "साइट सुरक्षित नहीं है" जैसी चेतावनी दिखा रहा है, तो वहां पर्सनल जानकारी बिल्कुल न डालें।

पैडलॉक आइकन पर क्लिक करके आप यह भी देख सकते हैं कि सर्टिफिकेट किसने जारी किया है और वो वैध है या नहीं।

क्या हर http साइट खतरनाक ही होती है

यहां एक ज़रूरी बात समझना ज़रूरी है - हर वो साइट जिसमें https नहीं है, वो फ्रॉड ही हो, यह ज़रूरी नहीं। कई बार छोटी, पुरानी या सिर्फ जानकारी देने वाली साइट्स (जहां कोई लॉगिन या पेमेंट नहीं होता) भी बिना https के चल जाती हैं। लेकिन जोखिम फिर भी बना रहता है, खासकर पब्लिक वाई-फाई पर। इसलिए सावधानी बरतना ही समझदारी है, चाहे साइट कितनी भी भरोसेमंद क्यों न लगे।

अगर आप खुद वेबसाइट या ब्लॉग चलाते हैं तो क्या करें

अगर आप खुद कोई ब्लॉग या वेबसाइट चला रहे हैं, तो https लगाना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि ज़रूरत है। ज़्यादातर होस्टिंग कंपनियां और Blogger, WordPress जैसे प्लेटफॉर्म अब फ्री SSL सर्टिफिकेट खुद ही उपलब्ध कराते हैं। इसे एक बार सेटअप कर देने के बाद आपकी साइट पर आने वाला हर विज़िटर सुरक्षित महसूस करता है, और गूगल भी आपकी साइट को थोड़ी बेहतर नज़र से देखता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: क्या https लगाने से वेबसाइट की स्पीड कम हो जाती है? नहीं, बल्कि आधुनिक SSL तकनीक (जैसे HTTP/2) की वजह से ज़्यादातर मामलों में साइट की स्पीड पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, कई बार यह पहले से बेहतर भी हो जाती है।

सवाल: क्या https वाली वेबसाइट का मतलब है कि वो 100% भरोसेमंद है? नहीं। https सिर्फ यह गारंटी देता है कि आपके और सर्वर के बीच डेटा एन्क्रिप्टेड है। इसका मतलब यह नहीं कि साइट का मालिक भरोसेमंद है। फिशिंग साइट्स भी https इस्तेमाल कर सकती हैं, इसलिए URL को ध्यान से पढ़ना भी ज़रूरी है।

सवाल: मोबाइल पर https चेक करने का तरीका क्या है? मोबाइल ब्राउज़र में भी एड्रेस बार में URL के शुरुआत में पैडलॉक आइकन या "https://" देखा जा सकता है, तरीका डेस्कटॉप जैसा ही है।

सवाल: अगर मैंने गलती से http साइट पर जानकारी डाल दी तो क्या करूं? जितनी जल्दी हो सके उस अकाउंट का पासवर्ड बदलें, और अगर बैंकिंग या कार्ड डिटेल डाली है तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचित करें और अकाउंट की एक्टिविटी पर नज़र रखें।

और लास्ट में यही कहना चाहूंगा कि अगली बार जब भी आप कोई नई वेबसाइट खोलें, तो सिर्फ एक सेकंड निकालकर एड्रेस बार को देख लीजिए। "https" और पैडलॉक आइकन जैसी छोटी सी चीज़ आपकी बड़ी परेशानी को टाल सकती है। इंटरनेट पर सुरक्षित रहना कोई मुश्किल काम नहीं, बस थोड़ी सी जागरूकता की ज़रूरत होती है।

नोट:- इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से साझा की गई है। यह किसी भी प्रकार की पेशेवर साइबर सुरक्षा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी वेबसाइट पर व्यक्तिगत, बैंकिंग या भुगतान संबंधी जानकारी साझा करने से पहले स्वयं सावधानी बरतें और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञ या अपने बैंक से संपर्क करें। लेखक या वेबसाइट किसी भी नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।

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