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2025 में AI से जुड़े नए कानून: भारत में यूज़र्स पर क्या असर पड़ेगा?

परिचय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज की दुनिया का सबसे तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल बाजार है, AI के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। नास्कॉम के अनुसार, भारत का AI बाजार 2025 तक 7.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो 20.2% की दर से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य, कृषि, वित्त, शिक्षा और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में AI का उपयोग आम हो गया है। लेकिन इस तेजी के साथ ही जोखिम भी बढ़े हैं-गलत सूचना, डीपफेक, गोपनीयता का उल्लंघन और पूर्वाग्रहपूर्ण एल्गोरिदम।

2025 में भारत सरकार ने AI को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सबसे प्रमुख है 5 नवंबर 2025 को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) द्वारा जारी 'इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस'। इसके अलावा, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2025 के संशोधन (IT रूल्स अमेंडमेंट) ने सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट (जैसे डीपफेक) को नियंत्रित करने के प्रावधान जोड़े हैं। डिजिटल इंडिया एक्ट (DIA) का ड्राफ्ट भी 2025 में चर्चा में रहा, जो IT एक्ट 2000 को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ये नए कानून और गाइडलाइंस यूज़र्स पर सीधा असर डालेंगे। एक ओर जहां ये गोपनीयता और सुरक्षा बढ़ाएंगे, वहीं दूसरी ओर कंटेंट क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स पर अनुपालन का बोझ भी पड़ेगा। इस ब्लॉग में हम इन कानूनों की विस्तृत व्याख्या करेंगे, उनके यूज़र्स पर प्रभाव को समझेंगे और वैश्विक संदर्भ में भारत की स्थिति का विश्लेषण करेंगे। हमारा उद्देश्य है कि पाठक न केवल अपडेटेड जानकारी प्राप्त करें, बल्कि ये समझें कि ये बदलाव उनके दैनिक डिजिटल जीवन को कैसे प्रभावित करेंगे।

भारत में AI का विकास: एक नजर

भारत AI का 'गैरेज' बनने की दिशा में अग्रसर है। 2025 तक, भारत में 4.2 लाख AI प्रोफेशनल्स हैं, जो दुनिया में दूसरे स्थान पर है। स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत AI स्किल पेनेट्रेशन में दूसरे और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में टॉप 10 देशों में है। इंडिया AI मिशन के तहत सरकार ने 38,000 GPUs सब्सिडाइज्ड रेट पर उपलब्ध कराए हैं, AIKosh में 1,500 डेटासेट्स और 217 AI मॉडल्स होस्ट किए गए हैं। चार स्टार्टअप्स को संप्रभु फाउंडेशन मॉडल्स विकसित करने के लिए समर्थन मिला है।

AI का उपयोग कृषि में प्रिसिजन फार्मिंग, स्वास्थ्य में डायग्नोस्टिक्स, वित्त में फ्रॉड डिटेक्शन और शिक्षा में पर्सनलाइज्ड लर्निंग के लिए हो रहा है। लेकिन चुनौतियां भी हैं: 2025 में डीपफेक से जुड़े मामले 49% बढ़े, जो चुनावों और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं। NITI Aayog की 2021 की 'प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पॉन्सिबल AI' को 2025 में अपडेट किया गया, जो नैतिकता पर जोर देती है।

ये विकास बताते हैं कि AI भारत की GDP में 500 बिलियन डॉलर जोड़ सकता है, लेकिन बिना नियमन के जोखिम भयावह हैं। नए कानून इसी अंतर को भरने का प्रयास हैं।

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2025 के प्रमुख AI कानून और गाइडलाइंस

1. इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस (नवंबर 2025)

MeitY द्वारा जारी यह 66-पेज का दस्तावेज AI को नियंत्रित करने का पहला व्यापक फ्रेमवर्क है। यह 'इनोवेशन ओवर रिस्ट्रेंट' की फिलॉसफी पर आधारित है, जो नवाचार को प्राथमिकता देता है लेकिन जोखिमों को कम करता है।

सात सूत्र (प्रिंसिपल्स):

  • ट्रस्ट: AI सिस्टम्स में विश्वास सुनिश्चित करना।
  • पीपल फर्स्ट: मानव कल्याण को प्राथमिकता।
  • इनोवेशन ओवर रिस्ट्रेंट: नियमन न्यूनतम लेकिन प्रभावी।
  • फेयरनेस एंड इक्विटी: पूर्वाग्रह मुक्त AI।
  • अकाउंटेबिलिटी: जिम्मेदारी तय।
  • अंडरस्टैंडेबल बाय डिजाइन: पारदर्शिता।
  • सेफ्टी, रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी: मजबूत और पर्यावरण-अनुकूल AI।

छह पिलर्स: इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपेसिटी बिल्डिंग, पॉलिसी एंड रेगुलेशन, रिस्क मिटिगेशन, अकाउंटेबिलिटी और इंस्टीट्यूशंस।

यह गाइडलाइंस गैर-बाइंडिंग हैं लेकिन सरकारी फंडिंग या पब्लिक सर्विसेज में एकीकरण के लिए अनिवार्य। RBI का FREE-AI रिपोर्ट (अगस्त 2025) से प्रेरित, यह सेक्टर-स्पेसिफिक रेगुलेशन को बढ़ावा देता है। शॉर्ट टर्म में AI गवर्नेंस ग्रुप (AIGG) और टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी (TPEC) की स्थापना, मीडियम टर्म में कानूनों में संशोधन (जैसे IT एक्ट में क्लासिफिकेशन)।

2. IT रूल्स अमेंडमेंट 2025 (अक्टूबर 2025)

IT (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) रूल्स, 2021 के संशोधन ने 'सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन' को परिभाषित किया: "कंप्यूटर रिसोर्स से आर्टिफिशियली क्रिएटेड कंटेंट जो असली लगे।"

प्रमुख प्रावधान:

  • यूज़र्स को AI-जनरेटेड कंटेंट (इमेज, वीडियो, ऑडियो) पर 10% विजुअल एरिया या ऑडियो की शुरुआती 10% में डिस्क्लेमर लगाना अनिवार्य।
  • प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) को वॉटरमार्किंग और मेटाडेटा से AI कंटेंट को पहचानना होगा।
  • गलत कंटेंट हटाने के लिए 'रीजनेबल एफर्ट्स'- कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं।
  • नॉन-कंप्लायंस पर सेफ हार्बर प्रोटेक्शन खोना (सेक्शन 79 IT एक्ट)।

यह डीपफेक और मिसइंफॉर्मेशन को रोकने के लिए है, जो 2025 में 49.26% CAGR से बढ़ रहा है।

3. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 और रूल्स 2025

DPDP रूल्स (जुलाई 2025) ने AI को प्रभावित किया:

  • पर्सनल डेटा प्रोसेसिंग में AI के लिए कंसेंट, डेटा मिनिमाइजेशन और ऑटोमेटेड डिसीजन-मेकिंग पर नियंत्रण।
  • यूज़र्स को ऑप्ट-आउट का अधिकार, ब्रेक नोटिफिकेशन।
  • बच्चों के डेटा के लिए वेरिफायबल पैरेंटल कंसेंट।

AI डेवलपर्स को प्राइवेसी-बाय-डिजाइन अपनाना होगा।

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4. डिजिटल इंडिया एक्ट (DIA) का ड्राफ्ट

2025 में पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी, DIA IT एक्ट को रिप्लेस करेगा। AI प्रावधान:

  • एल्गोरिदमिक अकाउंटेबिलिटी।
  • प्लेटफॉर्म लायबिलिटी।
  • यूज़र प्रोटेक्शन फॉर AI कंटेंट।
  • डेटा लोकलाइजेशन हाई-रिस्क AI के लिए।

यह 2026 तक कानून बन सकता है।

5. सेक्टर-स्पेसिफिक अपडेट्स

  • RBI का FREE-AI फ्रेमवर्क (अगस्त 2025): फाइनेंशियल AI में बायस असेसमेंट, ह्यूमन ओवरसाइट।
  • ICMR AI एथिक्स गाइडलाइंस: बायोमेडिकल AI के लिए एथिकल प्रिंसिपल्स।

ये सभी 2025 के अपडेट्स हैं, जो NITI Aayog की 2021 गाइडलाइंस को मजबूत करते हैं।

यूज़र्स पर असर: सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष

सकारात्मक प्रभाव

  1. गोपनीयता और सुरक्षा में वृद्धि: DPDP रूल्स से यूज़र्स को डेटा पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। AI ऐप्स (जैसे चैटजीपीटी) अब स्पष्ट कंसेंट लेंगे। 2025 में डेटा ब्रेक केस 30% कम हुए। उदाहरण: मेटा, गूगल को डेटा मिनिमाइजेशन अपनाना पड़ेगा, जो यूज़र्स को फायदा देगा।
  2. मिसइंफॉर्मेशन से सुरक्षा: IT अमेंडमेंट से डीपफेक लेबलिंग अनिवार्य। चुनावों में फेक न्यूज 25% घटी। यूज़र्स अब असली और फेक कंटेंट अलग कर सकेंगे, जो व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाएगा।
  3. फेयरनेस और इक्विटी: गाइडलाइंस पूर्वाग्रह मुक्त AI सुनिश्चित करेंगी। हेल्थकेयर AI में महिलाओं/ग्रामीणों के लिए बायस्ड डिसीजन कम होंगे। AI लिटरेसी प्रोग्राम्स से 10 करोड़ यूज़र्स को ट्रेनिंग।
  4. ट्रांसपेरेंसी: 'अंडरस्टैंडेबल बाय डिजाइन' से यूज़र्स जान सकेंगे कि AI निर्णय कैसे लेता है। जॉब रिक्रूटमेंट AI में रिजेक्शन के पीछे कारण स्पष्ट।

नकारात्मक प्रभाव

  1. अनुपालन का बोझ: कंटेंट क्रिएटर्स को हर AI-जनरेटेड पोस्ट पर डिस्क्लेमर लगाना पड़ेगा। छोटे इन्फ्लुएंसर्स के लिए चुनौतीपूर्ण-10% विजुअल स्पेस डिस्क्लेमर से क्रिएटिविटी प्रभावित।
  2. प्लेटफॉर्म्स पर असर: सोशल मीडिया यूज़र्स के अकाउंट सस्पेंड हो सकते हैं अगर लेबलिंग न हो। 2025 में 15% पोस्ट्स फ्लैग्ड।
  3. नवाचार में बाधा: हाई-रिस्क AI के लिए ऑडिट्स महंगे। स्टार्टअप्स पर 20% अतिरिक्त लागत।
  4. एक्सेसिबिलिटी इश्यू: ग्रामीण यूज़र्स को AI लिटरेसी की कमी से फायदा कम।

कुल मिलाकर, यूज़र्स को अधिक सुरक्षित लेकिन जिम्मेदार डिजिटल स्पेस मिलेगा।

वैश्विक संदर्भ: भारत की तुलना

वैश्विक AI रेगुलेशंस भारत को प्रभावित कर रहे हैं। EU AI एक्ट (2024) रिस्क-बेस्ड अप्रोच अपनाता है-अनैक्सेप्टेबल रिस्क AI (जैसे सोशल स्कोरिंग) बैन। भारत की गाइडलाइंस इससे मिलती-जुलती हैं लेकिन 'हैंड्स-ऑफ' अप्रोच के साथ, जो US की वॉलंटरी कमिटमेंट्स से प्रेरित।

चीन का 'मेजर्स फॉर आइडेंटिफाइंग AI-जनरेटेड सिंथेटिक कंटेंट' (सितंबर 2025) लेबलिंग पर सख्त है, जो भारत के IT अमेंडमेंट को प्रभावित। G20 और GPAI में भारत की भागीदारी से OECD AI प्रिंसिपल्स अपनाए गए।

भारत का अप्रोच 'इंडिया-स्पेसिफिक' है-सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं (जैसे भाषाई विविधता) को ध्यान में रखते हुए। लेकिन चुनौती: एन्फोर्समेंट कैपेसिटी, जहां EU की तुलना में कम। 2026 के AI इम्पैक्ट समिट में भारत ग्लोबल लीडरशिप लेगा।

निष्कर्ष

2025 के AI कानून भारत को जिम्मेदार AI का हब बनाने की दिशा में ले जा रहे हैं। यूज़र्स के लिए ये सुरक्षा बढ़ाएंगे लेकिन अनुपालन की जिम्मेदारी भी लाएंगे। सरकार, इंडस्ट्री और यूज़र्स को मिलकर काम करना होगा ताकि AI समावेशी बने। भविष्य में DIA और AI बिल से और मजबूती आएगी।

विस्तार: यूज़र्स के लिए व्यावहारिक सलाह

डेली यूज़र्स के लिए

  • सोशल मीडिया पर: हमेशा AI टूल्स (जैसे मिडजर्नी) से बने कंटेंट पर डिस्क्लेमर लगाएं। वॉटरमार्क चेक करें।
  • प्राइवेसी: ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें; कंसेंट दें लेकिन ऑप्ट-आउट का उपयोग करें।
  • जागरूकता: AI लिटरेसी कोर्स (भारत सरकार के पोर्टल पर फ्री) लें।

क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए

  • कंप्लायंस टूल्स: वॉटरमार्किंग सॉफ्टवेयर (जैसे Adobe फायरफ्लाई) अपनाएं।
  • ऑडिट्स: हाई-रिस्क AI (जैसे HR टूल्स) के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट करवाएं।
  • रिस्क असेसमेंट: गाइडलाइंस के सात सूत्रों पर आधारित चेकलिस्ट बनाएं।

उदाहरण: एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर ने 2025 में AI-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया बिना लेबल; अकाउंट 7 दिन सस्पेंड। अब वे हमेशा डिस्क्लेमर लगाते हैं।

फ्यूचर आउटलुक

2026 तक AI इंसिडेंट डेटाबेस और सैंडबॉक्सेस से रेगुलेशन मजबूत होंगे। यूज़र्स को AI को टूल के रूप में अपनाना होगा, न कि खतरे के।

नोट:-यह ब्लॉग आधिकारिक स्रोतों (MeitY, RBI, NITI Aayog, NASSCOM, स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स) पर आधारित है। AI कानून तेजी से बदलते हैं, इसलिए हमेशा अपडेट्स के लिए MeitY वेबसाइट या कानूनी विशेषज्ञ से संपर्क करें। यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य से है, कानूनी सलाह नहीं।

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